52 भैरव मंत्र | 64 जोगनी 52 भैरव मंत्र और नाम | 64 योगिनी शाबर मंत्र और विधि

52 भैरव मंत्र | 64 जोगनी 52 भैरव मंत्र और नाम | 64 योगिनी शाबर मंत्र और विधि – दोस्तों भैरव को भगवान शिव का रूप माना जाता हैं. भैरव के 52 रूपों की या फिर किसी भी एक रूप की साधना करनी चाहिए. इससे मनचाही मनोकामना पूर्ण होती हैं.

आज हम इस आर्टिकल के माध्यम से आपको 52 भैरव मंत्र बताएगे. तथा इस मंत्र को विधि विधान से करना पड़ता है. तो हम आपको विधि भी बताएगे.

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52 भैरव मंत्र और नाम 

भैरव के 52 मंत्र हमने नीचे दिए हैं. आप इस मंत्र का जाप विधि विधान से कर सकते हैं. जिससे साधक की मनोकामना पूर्ण होती हैं.

52 भैरव मंत्र

करन्यास

ह्रां वां अंगुष्ठाभ्यां नमः

ह्रीं वीं तर्जनीभ्याम नमः

ह्रूं वूं मध्यमाभ्याम नमः

ह्रैं वैं अनामिकाभ्याम नमः

ह्रों वों कनिष्ठिकाभ्याम नमः

ह्रः वः करतलकरपृष्ठाभ्याम नमः

[ करन्यासवत हृद्यादी न्यास ]

नैवेद्य

ऎह्ये हि देवी पुत्र बटुकनाथ कपिलजटाभारभास्वर त्रिनेत्र ज्वालामुख सर्व विघ्नान नाशय नाशय सर्वोपचार सहित बलिं गृहण गृहण स्वाहा

ॐ भैरवो भूतनाथश्च भूतात्मा भूतभावन।

क्षेत्रज्ञः क्षेत्रपालश्च क्षेत्रदः क्षत्रियो विराट्॥१॥

श्मशान वासी मांसाशी खर्पराशी स्मरांतकः।

रक्तपः पानपः सिद्धः सिद्धिदः सिद्धिसेवित॥२॥

कंकालः कालशमनः कलाकाष्टातनु कविः।

त्रिनेत्रो बहुनेत्रश्च तथा पिंगल-लोचनः॥३॥

शूलपाणिः खङ्गपाणिः कंकाली धूम्रलोचनः।

अभीरूर भैरवीनाथो भूतपो योगिनीपतिः॥४॥

धनदो अधनहारी च धनवान् प्रतिभानवान्।

नागहारो नागपाशो व्योमकेशः कपालभृत्॥५॥

कालः कपालमाली च कमनीयः कलानिधिः।

त्रिलोचनो ज्वलन्नेत्रः त्रिशिखा च त्रिलोकपः ॥६॥

त्रिनेत्र तनयो डिम्भशान्तः शान्तजनप्रियः।

बटुको बहुवेषश्च खट्वांग वरधारकः॥७॥

भूताध्यक्षः पशुपतिः भिक्षुकः परिचारकः।

धूर्तो दिगम्बरः शूरो हरिणः पांडुलोचनः॥८॥

प्रशांतः शांतिदः शुद्धः शंकर-प्रियबांधवः।

अष्टमूर्तिः निधीशश्च ज्ञान-चक्षुः तपोमयः॥९॥

अष्टाधारः षडाधारः सर्पयुक्तः शिखिसखः।

भूधरो भुधराधीशो भूपतिर भूधरात्मजः॥१०॥

कंकालधारी मुण्डी च नागयज्ञोपवीतिकः ।

जृम्भणो मोहनः स्तम्भो मारणः क्षोभणस्तथा ॥११॥

शुद्धनीलांजन प्रख्यो दैत्यहा मुण्डभूषितः।

बलिभुग् बलिभंगः वैद्यवीर नाथी पराक्रमः ॥१२॥

सर्वापित्तारणो दुर्गे दुष्टभूत-निषेवितः।

कामी कलानिधि कान्तः कामिनी वशकृद्वशी॥१३॥

सर्व सिद्धि परदों वैद्यः प्रभुर्विष्णुरितीव हि

अष्टोतर शतं नाम्नां भैरवस्य महात्मनः ॥१४॥

मयाते कथितं देवी रहस्य सर्व कामिकं

यः इदं पठत स्तोत्रं नामाष्टशतमुत्तमम् ॥१५॥

यह मंत्र का जाप नीचे दिए गए विधि विधान अनुसार करना हैं.

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52 भैरव मंत्र जाप की विधि

यह मंत्र जाप करने की विधि अत्यंत सरल हैं. साधक को मंगलवार के दिन बटुक भैरव यंत्र अपने सामने स्थापित करना हैं. अब बटुक भैरव यंत्र का पंचोपचार पूजन करना हैं. और इस मंत्र का रोजाना पाठ करना हैं. यह मंत्र 11000 बार पाठ करने से सिद्ध होता हैं. यह पाठ करने के बाद तथा पूजन करने के बाद किसी कुत्ते को खीर खिला दे.

दोस्तों इस तरीके से 52 भैरव मंत्र विधि विधान से करने से साधक को मनचाहा फल मिलता हैं.

अब हम आपको 64 योगिनी मंत्र और विधि आपको बताएगे

64 योगिनी मंत्र और नाम 

(1) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री काली नित्य सिद्धमाता स्वाहा।

(2) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री कपलिनी नागलक्ष्मी स्वाहा।

(3) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री कुला देवी स्वर्णदेहा स्वाहा।

(4) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री कुरुकुल्ला रसनाथा स्वाहा।

(5) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री विरोधिनी विलासिनी स्वाहा।

(6) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री विप्रचित्ता रक्तप्रिया स्वाहा।

(7) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री उग्र रक्त भोग रूपा स्वाहा।

(8) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री उग्रप्रभा शुक्रनाथा स्वाहा।

(9) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री दीपा मुक्तिः रक्ता देहा स्वाहा।

(10) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री नीला भुक्ति रक्त स्पर्शा स्वाहा।

(11) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री घना महा जगदम्बा स्वाहा।

(12) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री बलाका काम सेविता स्वाहा।

(13) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री मातृ देवी आत्मविद्या स्वाहा।

(14) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री मुद्रा पूर्णा रजतकृपा स्वाहा।

(15) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री मिता तंत्र कौला दीक्षा स्वाहा।

(16) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री महाकाली सिद्धेश्वरी स्वाहा।

(17) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री कामेश्वरी सर्वशक्ति स्वाहा।

(18) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री भगमालिनी तारिणी स्वाहा।

(19) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री नित्यकलींना तंत्रार्पिता स्वाहा।

(20) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री भैरुण्ड तत्त्व उत्तमा स्वाहा।

(21) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री वह्निवासिनी शासिनि स्वाहा।

(22) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री महवज्रेश्वरी रक्त देवी स्वाहा।

(23) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री शिवदूती आदि शक्ति स्वाहा।

(24) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री त्वरिता ऊर्ध्वरेतादा स्वाहा।

(25) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री कुलसुंदरी कामिनी स्वाहा।

(26) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री नीलपताका सिद्धिदा स्वाहा।

(27) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री नित्य जनन स्वरूपिणी स्वाहा।

(28) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री विजया देवी वसुदा स्वाहा।

(29) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री सर्वमङ्गला तन्त्रदा स्वाहा।

(30) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री ज्वालामालिनी नागिनी स्वाहा।

(31) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री चित्रा देवी रक्तपुजा स्वाहा।

(32) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री ललिता कन्या शुक्रदा स्वाहा।

(33) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री डाकिनी मदसालिनी स्वाहा।

(34) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री राकिनी पापराशिनी स्वाहा।

(35) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री लाकिनी सर्वतन्त्रेसी स्वाहा।

(36) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री काकिनी नागनार्तिकी स्वाहा।

(37) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री शाकिनी मित्ररूपिणी स्वाहा।

(38) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री हाकिनी मनोहारिणी स्वाहा।

(39) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री तारा योग रक्ता पूर्णा स्वाहा।

(40) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री षोडशी लतिका देवी स्वाहा।

(41) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री भुवनेश्वरी मंत्रिणी स्वाहा।

(42) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री छिन्नमस्ता योनिवेगा स्वाहा।

(43) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री भैरवी सत्य सुकरिणी स्वाहा।

(44) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री धूमावती कुण्डलिनी स्वाहा।

(45) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री बगलामुखी गुरु मूर्ति स्वाहा।

(46) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री मातंगी कांटा युवती स्वाहा।

(47) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री कमला शुक्ल संस्थिता स्वाहा।

(48) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री प्रकृति ब्रह्मेन्द्री देवी स्वाहा।

(49) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री गायत्री नित्यचित्रिणी स्वाहा।

(50) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री मोहिनी माता योगिनी स्वाहा।

(51) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री सरस्वती स्वर्गदेवी स्वाहा।

(52) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री अन्नपूर्णी शिवसंगी स्वाहा।

(53) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री नारसिंही वामदेवी स्वाहा।

(54) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री गंगा योनि स्वरूपिणी स्वाहा।

(55) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री अपराजिता समाप्तिदा स्वाहा।

(56) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री चामुंडा परि अंगनाथा स्वाहा।

(57) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री वाराही सत्येकाकिनी स्वाहा।

(58) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री कौमारी क्रिया शक्तिनि स्वाहा।

(59) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री इन्द्राणी मुक्ति नियन्त्रिणी स्वाहा।

(60) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री ब्रह्माणी आनन्दा मूर्ती स्वाहा।

(61) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री वैष्णवी सत्य रूपिणी स्वाहा।

(62) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री माहेश्वरी पराशक्ति स्वाहा।

(63) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री लक्ष्मी मनोरमायोनि स्वाहा।

(64) ॐ ऐं ह्रीं श्रीं श्री दुर्गा सच्चिदानंद स्वाहा।

हमने आपको मंत्र तो बता दिए अब 64 योगिनी मंत्र करने की विधि आपको बताएगे.

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64 योगिनी मंत्र करने की विधि

64 योगिनी की साधना आप सोमवार या फिर अमावस्या और पूर्णिमा की रात्रि से आरंभ कर सकते हैं. साधना आरंभ करने से पहले स्नान आदि से निवृत होकर अपने गुरुदेव, इष्टदेव तथा पितृ के आशीर्वाद ले. इसके बाद गणेश मंत्र और गुरु मंत्र का जाप करे. ताकि साधना में कोई बाधा ना आए.

भगवान शिव की पूजा करते हुए शिवलिंग पर जल तथा चावल अर्पित करे. इसके बाद आपकी पूजा का आरंभ करे. इसके बाद आप जिस योगिनी को सिद्ध करना चाहते हैं. उस मंत्र की एक माला या ग्यारह माला का जाप करे.

निष्कर्ष

दोस्तों आज हमने आपको इस आर्टिकल के माध्यम से 52 भैरव मंत्र तथा 64 योगिनी मंत्र और नाम  बताए. तथा इस मंत्र की विधि भी आपको बताई हैं.

हम आशा करते है की आपको हमारा यह आर्टिकल (52 भैरव मंत्र | 64 जोगनी 52 भैरव मंत्र और नाम | 64 योगिनी शाबर मंत्र और विधि) अच्छा लगा होगा. धन्यवाद.

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