Bhagwan ganesh Vinayak ji ki sachchi katha kahani in hindi

Bhagwan ganesh Vinayak ji ki sachchi katha kahani in hindi – दोस्तों भगवान गणेश को विनायक के नाम से भी जाना जाता हैं. भगवान गणेश विघ्न दूर करते है. इसलिए इन्हें विघ्नहर्ता भी कहा जाता है. हिंदू धर्म में कोई भी शुभ कार्य करने से पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है. इनके बाद ही और देवी देवता की पूजा होती हैं.

दोस्तों आज हम इस आर्टिकल के माध्यम से भगवान गणेश विनायक की तिन कहानी आपको बताएगे जो सच्ची कहानियां हैं. यह कहानी बच्चो को भी पंसद आएगी.

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Bhagwan ganesh Vinayak ji ki sachchi katha kahani in hindi

कहानी-1

जब गणेश जी ने पलक झपकते ही पूरी करली संसार की परिक्रमा

एक समय की बात है. जब सभी देवता एक मुसीबत में पड गए. सभी देवता शिवजी की शरण में अपनी परेशानी लेकर पहुंच गए. उस समय भगवान गणेश और कार्तिकेय भी उनके साथ ही बैठे थे.

देवताओं की परेशानी देखकर शिवजी ने गणेश और कार्तिकेय से पूछा की “आप दोनों में से देवताओं की परेशानी कौन हल कर सकता है. उनकी मदद कौन कर सकता है” जब दोनों भाई मदद के लिए सामने आए. तो शिवजी ने एक प्रतियोगिता रखी. और कहा की “देवताओं की परेशानी वही हल कर सकेगा. जो पुरे संसार की परिक्रमा करके पहले लौटकर आएगा”.

अपने पिता की बात सुनकर कार्तिकेय अपना वाहन मयूर के साथ संसार की परिक्रमा करने निकल पड़े. लेकिन गणेश जी वही खड़े रहकर सोचने लगे की वह अपने वाहन मूषक से कैसे संसार की परिक्रमा कर पाएगे. इसमें तो बरसो बीत जाएगे फिर भी परिक्रमा पूर्ण नही होगी.

उसी समय गणेश के मन में एक विचार आया. वह शिवजी और पार्वती माता के नजदीक गए और उनके चारो और सात बार परिक्रमा लगाकर अपनी जगह पर आकर खड़े रह गए.

कुछ ही समय बाद कार्तिकेय अपने वाहन मयूर के साथ विश्व की परिक्रमा करके लौट आए और खुद को विजेता बताने लगे. तभी शिवजी ने गणेश जी से पूछा की “तुम क्यों संसार की परिक्रमा लगाने नहीं गए”.

तब गणेशजी ने तुरंत उत्तर दिया की “माता-पिता में ही तो पूरा संसार है, चाहे में पृथ्वी की परिक्रमा करू या माता-पिता की परिक्रमा करू बात तो एक ही हैं”

यह बात सुनकर शिवजी गणेशजी पर प्रसन्न हो गए. और देवताओं की मदद करने की आज्ञा दी. इसके साथ शिवजी ने गणेशजी को आशीर्वाद भी दिए की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी पर जो भी व्यक्ति तुम्हारी पूजा-अर्चना करेगा तथा व्रत रखेगा उनके सभी दुःख का निवारण होगा. उन्हें सभी सुखों की प्राप्ति होगी.

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कहानी-2

बच्चे गणेशजी को कहते हैहाथी भगवान

एक दिन माता पार्वती स्नान कर रही थी. लेकिन उनके द्वार पर कोई रक्षक नहीं था. इसलिए माता पार्वती ने चंदन के पेस्ट से गणेश को अवतार दिया. और गणेश जी प्रकट होकर आ गए. जैसे ही गणेशजी अवतरित हुए माता पार्वती ने आदेश दिया की उनकी अनुमति के बिना किसी को भी घर में प्रवेश नहीं दे.

इसी दौरान शिवजी लौटे और देखा की द्वार पर एक बालक खड़ा हैं. जब शिवजी घर में प्रवेश करने लगे तो बालक ने उन्हें रोका और घर में नहीं जाने दिया. इसी बात पर शिवजी क्रोधित हो गए और अपनी सवारी बैल नंदी से बालक के साथ युद्ध करने का आदेश दिया.

बालक ने युद्ध में नंदी को हरा दिया. यह देखकर भगवान शिवजी अचरज में पड गए तथा और ज्यादा क्रोधित हो गए. क्रोध में आकर शिवजी ने अपना त्रिशूल उठाया और उस बालक का सर धड से अलग कर दिया.

इसी बिच माता पार्वती स्नान करके द्वार पर लौटती है. और यह सब देखकर दुखी हो जाती हैं. और रोने लगती हैं. माता पार्वती का दुःख और रोना देखकर शिवजी हैरान रह गए. तब माता पार्वती उनके बेटे की अवतार लेने की कथा सुनाते हैं. शिवजी को जब पता चलता है. की यह बालक तो उन्ही का पुत्र था. तब उन्हें अपनी गलती का अहसास होता हैं.

शिवजी पार्वती को समझाने की कोशिश करते है. लेकिन माता पार्वती नहीं मानती है कहती है की “मुजे किसी भी हालत में मेरा बेटा जिंदा चाहिए” और क्रोधित होकर शिवजी को उनकी शक्ति से बालक को जीवित करने का आदेश देती हैं.

तब शिवजी बोले- “हे पार्वती में गणेश को जीवित तो कर सकता हु. परंतु किसी अन्य जीवित प्राणी का सिर जोड़कर ही जीवित कर सकता हूं. तब माता पार्वती रोते हुए कह देती है की “मुजे हर हाल में मेरा बेटा जीवित चाहिए”.

यह सुनते ही शिवजी नंदी को संसार में किसी भी जीवित प्राणी का सिर काटकर ले आने का आदेश देते हैं. शिवजी का आदेश सुनते ही नंदी चले गए और उन्हें जंगल में एक हाथी का बच्चा दिखा जो अपनी माँ के पीठ पीछे सोता हुआ दिखाई दिया.

नंदी उस हाथी के बच्चे का सिर काटकर ले गया. शिवजी ने उस हाथी का सिर गणेशजी के धड से जोड़ दिया. इस प्रकार गणेशजी को नया जीवनदान मिल गया.

इसलिए शिवजी ने गणेशजी का नाम गणपति रखा. फिर सभी देवताओं ने गणेशजी को वरदान दिया की संसार में जब भी कोई शुभ कार्य होगा तब सबसे पहले श्री गणेश को याद किया जाएगा.

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कहानी-3

गणेश और मूषक की कहानी

एक समय की बात हैं. असुरों का राजा गजमुख चारों तरफ आतंक मचा रहा था. वह सभी लोगो में शक्तिशाली और धनवान बनना चाहता था. और सभी देवी देवताओं को अपने वश में करना चाहता था. वह इस वरदान को पाने के लिए भगवान शिव की तपस्या करता हैं. वह अपना राज्य छोड़कर जंगल में रहकर बिना भोजन पानी के शिवजी की तपस्या करने लगा.

कुछ सालों बाद शिवजी उसकी तपस्या से प्रसन्न हो गए. और खुश होकर दैवीय शक्ति प्रदान कर दी जिससे वह बहुत ही शक्तिशाली हो गया. शिवजी ने उसे ऐसी शक्ति दे दी की उसे कोई भी शस्त्र से नहीं मार सकता. यह शक्ति पाकर गजमुख इन शक्तियों का दुरूपयोग करने लगा. उसने देवी देवताओं पर भी आक्रमण कर दिया.

उसके आतंक से सिर्फ गणेशजी, ब्रह्माजी, विष्णुजी और शिवजी ही बच सकते थे. गजमुख चाहता था की सभी देवी देवता उसकी पूजा करने लगे. सभी देवी देवता परेशान होकर शिवजी के शरण में पहुंचे.

शिवजी ने गणेशजी को गजमुख को रोकने के लिए भेजा. गणेशजी के समझाने पर गजमुख नही माना तो दोनों के बिच युद्ध हो गया. गजमुख युद्ध में बुरी तरह से घायल हो गया फिर भी वह नहीं माना.

देखते ही देखते गजमुख ने मूषक का रूप ले लिया और गणेशजी पर हमला करने के लिए दौड़ पड़ा. जैसे ही वह गणेशजी के पास आया गणेशजी कूदकर उसपर बैठ गए. गणेशजी ने गजमुख को हमेशा के लिए मूषक में बदल दिया. और अपने वाहन के रूप में जीवनभर के लिए अपने पास रख लिया. इस घटना के बाद गजमुख बहुत प्रसन्न हो गया और गणेशजी का प्रिय मित्र बन गया.

निष्कर्ष

दोस्तों आज हमने इस आर्टिकल (Bhagwan ganesh Vinayak ji ki sachchi katha kahani in hindi) के माध्यम से आपको गणेशजी विनायक से संबंधित तिन सच्ची कहानी आपको बताई. हम आशा करते आपको यह कहानी अच्छी लगी होगी.

दोस्तों हम आशा करते है की आपको हमारा यह आर्टिकल अच्छा लगा होगा. धन्यवाद

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