gaaj mata ki kahani in hindi sunaiye / गाज माता की कहानी हिंदी में

gaaj mata ki kahani in hindi sunaiye – गाज माता की पूजा और व्रत भादवा महीने में की जाती हैं. इस व्रत में गाज माता की कहानी सुनी जाती हैं. गाज माता का व्रत और पूजा करने से और उनके व्रत पर उनकी कहानी सुन के सम्पूर्ण फल की प्राप्ति होती हैं. और गाज माता की कृपा बनी रहती हैं.

आज हम आप के लिए इस आर्टिकल के माध्यम से gaaj mata ki kahani in hindi sunaiye लेकर आए हैं. आप व्रत में इनमें से गाज माता की कोई भी कहानी पढ़ सकते हैं.

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Gaaj mata ki kahani-1 | गाज माता की कहानी-1

पुराने समय की बात है एक नगर के राजा और रानी थे. उन्हें कोई भी संतान नहीं थी. इस कारण राजा और रानी दुखी रहते थे. महारानी गाज माता में बहुत ही श्रद्धा रखती थी.

एक दिन रानी ने गाज माता से कहा की “हे माता अगर मेरे गर्भ रह जाता है. तो में आपको हलवा और कढाई कर दुगी”. उसके बाद गाज माता ने उनकी सुनी और पुत्र प्राप्ति का वरदान दिया.

कुछ दिन बाद रानी के घर बेटे का जन्म हुआ लेकिन रानी माता को कढाई करना भूल गई. इस कारण गाज माता रुष्ट हो गई. माता ने सोचा की मेने इसको बेटे की खुशी दी और यह तो मुझे भूल गई. माता ने रुष्ट होकर एक दिन जब बेटा पालने में सोया था. तब एक गरजती हुई बादली आई और रानी के बेटे को उठाकर चली गई.

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बादली ने बच्चे को ले जाकर जंगल में छोड़ दिया. वहा से एक भील और भीलनी गुजर रहे थे. उन्हें भी कोई संतान नहीं थी. भील और भीलनी ने जंगल में पालने में सोया हुआ बच्चा देखा और अत्यंत खुश होते हुए उसे अपने घर लेकर गए.

उसी नगर में एक धोबी भी रहता था. जो राजा के कपडे भी धोता था. और भील-भीलनी के कपड़े भी धोता था. जब वह धोबी कपडे लेने के लिए राजा के महल में गया. तो वहा उसने शोर मचा हुआ देखा. और धोबी को जानने मिला की गाज माता रानी के बेटे को लेकर चली गई. तब धोबी ने कहा की आज ही उसने भील-भीलनी के घर एक बच्चा पालने में सोता हुआ देखा.

जब राजा ने यह बात सुनी तो भील को अपने महल बुलाया. और पूछा की यह बच्चा उसके घर कैसे आया. तब भील-भीलनी ने कहा की “हम गाज माता का व्रत करते है. तो गाज माता ने हमें बेटा दिया हैं”. यह बात सुनकर राजा और रानी को याद आया की वह गाज माता को कढाई करना भूल गए थे.

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इस कारण गाज माता ने रुष्ट होकर हमसे हमारा बेटा ले लिया. तब रानी ने गाज माता से फिर विनंती की “हे माता मुझे मेरा बेटा लौटा दे. मै इससे दुगुना आप के लिए कढाई करुगी. और गाज माता का धूमधाम से उजमन करुगी”.तब गाज माता ने रानी को माफ़ किया और उनका बेटा उन्हें लौटा दिया.

गाज माता ने प्रसन्न होकर भील-भीलनी को भी बहुत धन-संपदा दी और उनको भी सुंदर बेटा दिया.

राजा ने खुश होकर पुरे गांव में ढिंढोरा पिटवा दिया. की जब भी किसी के घर लड़का या शादी हो तो गाज माता का उजमन जरुर करे. गाज माता ने जैसे रानी को लड़का दिया. और भील-भीलनी को धन-संपदा और लड़का दिया ऐसे ही गाज माता सबको ख़ुशी प्रदान करना.

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गाज माता की कहानी कहने वाले को, गाज माता की कहानी सुनने वाले को और हांमी भरने वालो के दुख दूर करना तथा सुख प्रदान करना.

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Gaaj mata ki kahani-2 | गाज माता की कहानी-2

एक राजा और रानी थे. उन्होंने अपने पुत्र का विवाह किया. लेकिन शादी के काफी साल बाद भी रानी की बहु को पुत्र प्राप्ति का सुख नही मिल रहा था. एक दिन की बात है रानी अपनी सहेली के घर गई. तो वह गाज माता की कहानी सुन रही थी.

तब रानी ने भी सहेली के वहा गाज माता की कहानी सुनी. और उसी समय संकल्प लिया की मेरी बहु को अगर गर्भ रह जाता है. तो सवा सेर का रोट चड़ाऊँगी. इस संकल्प से रानी की मनोकामना पूर्ण हुई.

जब गाज माता का दिन आया तो रानी ने उनकी बहु को 8 तार का धागा हल्दी में रंग के बहु को मंगलसूत्र में बांध ने के लिए कहा. बहु ने रानी की बात मानी और मंगलसूत्र में धागा बांध लिया. लेकिन रानी के बेटे को यह बात अच्छी नही लगी.

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रानी के बेटे ने कहा की “इतने कीमती मोती लगे हुए है. उसके साथ यह धागा क्यों बांध रखा हैं”. तब रानी की बहु ने कहा की “यह गाज माता का डोरा हैं”.

राजकुमार ने उसकी पत्नी के गले से डोरा उतार दिया. वही रानी ने गाज माता के नाम मोटा रोट बनाया. जब राजकुमार ने पत्नी को मोटा रोट खाते हुए देखा तो कहा की यह रोट बहुत मोटा है. यह रोट खाओगी तो बच्चे का पेट दुखेगा बच्चा अभी बहुत छोटा हैं. यह रोट मत खाओ.

बहु ने वैसा ही किया और रोट नौकरानी को दे दिया. इससे गाज माता रुष्ट हो गई. और तेज तूफान के साथ बेटे को ले गई. और एक भीलनी के आंगन में छोड़ दिया. भीलनी को भी कोई बच्चा नही था तो यह देखकर भीलनी खुश हो गई.

उधर महल में हाहाकार मच गई. रानी और बहु गाज माता से गलती माफ़ करने के लिए प्रार्थना करने लगी. फिर रानी ने सवा मन का रोट बनाकर गाज माता को चढ़ाया और पूजा करने लगी.

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गाज माता ने क्षमा मागने पर उन्हें माफ़ी दे दी. और भीलनी के मन में ऐसा विचार भर दिया की यह बच्चा जिसका होगा वह कितना दुखी होगा. इसलिए भीलनी बच्चे को लेकर महल की तरफ आई. तब उसे पता चला की यह बच्चा राजकुमार का हैं. भीलनी ने बच्चा रानी को दिया. महारानी ने भीलनी से कहा की “यह सभी गाज माता के प्रकोप के कारण हुआ हैं”.

भीलनी ने महारानी से गाज माता के बारे में पूछा तो महारानी ने सब विस्तारपूर्वक बताया. यह सभी बात सुनकर भीलनी ने भी रोट चढाने का संकल्प लिया. उसके बाद गाज माता भीलनी पर खुश होकर उसे भी पुत्र का सुख दिया. हे गाज माता जैसे रानी को भीलनी को फल दिया वैसा फल सभी को देना और जैसा प्रकोप किया वैसा प्रकोप किसी पर न करना.

गाज माता की कहानी कहने वाले, गाज माता की कहानी सुनने वाले और हांमी भरने वालो के घर सुख देना और सभी दुख हर लेना.

हम आशा करते है की आपको गाज माता की कहानी अच्छी लगी होगी.

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निष्कर्ष

दोस्तों आज हमने आपको इस आर्टिकल gaaj mata ki kahani in hindi sunaiye के माध्यम से गाज माता की कहानी आपको सुनाई. आप भी गाज माता के व्रत के दिन यह दोनों कहानी सुने और गाज माता के आशीर्वाद प्राप्त करे.

दोस्तों हम आशा करते है की आपको हमारा यह gaaj mata ki kahani in hindi sunaiye आर्टिकल अच्छा लगा होगा. धन्यवाद

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