जनेऊ मंत्र तथा नियम / जनेऊ पहनने का मंत्र / ब्राह्मण जनेऊ मंत्र

जनेऊ मंत्र तथा नियम / जनेऊ पहनने का मंत्र / ब्राह्मण जनेऊ मंत्र – हिंदू सनातन धर्म में जनेऊ पहनने का नियम हैं. जनेऊ कोई भी पहन सकता हैं. लेकिन जनेऊ पहनने के बाद कुछ नियमों का पालन करना जरूरी होता हैं. जनेऊ समाज का कोई भी वर्ग और कोई भी लोग पहन सकते हैं. जनेऊ पहनने के बाद व्यक्ति का दूसरा जन्म माना जाता हैं. जिसे द्विज के नाम से जाना जाता हैं.

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दोस्तों आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से जनेऊ मंत्र तथा जनेऊ के नियम बताने वाले हैं. इसके अलावा इस टॉपिक से जुडी अन्य और भी जानकारी प्रदान करने वाले हैं. यह सभी महत्वपूर्ण जानकारी पाने के लिए हमारा यह आर्टिकल अंत तक जरुर पढ़े.

तो आइये हम आपको इस बारे में संपूर्ण जानकारी प्रदान करते हैं.

जनेऊ मंत्र / जनेऊ पहनने का मंत्र / ब्राह्मण जनेऊ मंत्र

जनेऊ पहनने का ब्राह्मण मंत्र हमने नीचे बताया हैं.

ॐ यज्ञोपवीतम् परमं पवित्रं प्रजा-पतेर्यत -सहजं पुरुस्तात।

आयुष्यं अग्र्यं प्रतिमुन्च शुभ्रं यज्ञोपवितम बलमस्तु तेजः।।

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जनेऊ के नियम                   

जनेऊ पहनने के बाद व्यक्ति को कुछ नियम का पालन करना होता हैं. जनेऊ पहनने के बाद पालने वाले नियम के बारे में हमने आपको नीचे बताया हैं.

  • जनेऊ पहनने के बाद मल-मूत्र विसर्जन के दौरान जनेऊ को दाहिनें कान पर चढाया जाता हैं. और मल-मूत्र विसर्जन करने के बाद हाथ स्वस्छ करके ही जनेऊ कान पर से उतारा जाता हैं.
  • जनेऊ 6 महीने से अधिक नहीं पहनना चाहिए. तथा जनेऊ का तार टूट जाए तो उसे बदल लेना चाहिए.
  • अगर जनेऊ के धागे कच्चे और गंदे होने लगे तो उससे पहले ही जनेऊ बदल देनी चाहिए.
  • घर में जन्म मरण के बाद सूतक लग जाता हैं. सूतक के बाद जनेऊ बदल देना चाहिए.
  • जनेऊ को एक बार धारण करने के बाद शरीर से अलग नहीं करना चाहिए. अगर आप जनेऊ को धोना चाहे. तो शरीर पर पहना रखकर ही धो लीजिए.
  • अगर आपसे जनेऊ गलती से उतर जाए. तो प्रायश्चित की एक माला जाप करने के बाद ही फिर से पहना जा सकता हैं.
  • कोई भी बालक जनेऊ पहनने के योग्य हो जाए इसके बाद ही उसे जनेऊ पहनाएं.
  • अगर महिला चाहे तो जनेऊ धारण कर सकती हैं. लेकिन हर महीने मासिक धर्म के बाद जनेऊ बदल देना चाहिए.

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जनेऊ किस कंधे पर पहना जाता है

जनेऊ को बाएं कंधे के ऊपर तथा दाई भुजा के नीचे पहना जाता हैं.

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जनेऊ किस दिन धारण करना चाहिए                  

जनेऊ आप किसी भी दिन आपके घर में धार्मिक कार्य के दौरान तथा हवन आदि जैसे अवसर पर पहन सकते हैं.

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जनेऊ क्यों पहना जाता है

जनेऊ पहनने के पीछे काफी सारे धार्मिक और वैज्ञानिक कारण हैं. जिसके बारे में हमने नीचे जानकारी प्रदान की हैं.

  • धार्मिक मान्यता के अनुसार जनेऊ धारण करने के बाद शरीर शुद्ध और पवित्र हो जाता हैं.
  • अगर आपको बार बार बुरे स्वप्न आते हैं. तो जनेऊ धारण करने के ऐसे स्वप्न नहीं आते हैं.
  • जनेऊ पहनने के बाद व्यक्ति अपने शरीर की अच्छे से साफ-सफाई करने के नियम में बंध जाता हैं.
  • ऐसा माना जाता है की जनेऊ धारण करने के बाद कुछ काम के दौरान कान पर धारण की जाती हैं. कान पर धारण करने से मस्तिष्क की कोई ऐसी नस दबती है. जिससे सोई हुई कोई तंत्रिका कार्य करने लगती हैं.
  • कान में जनेऊ धारण करने से व्यक्ति की सूर्य नाडी जाग्रित होती हैं.
  • मूत्र विसर्जन के दौरान जनेऊ कान पर धारण की जाती हैं. इससे व्यक्ति के शुक्राणु की रक्षा होती हैं.
  • जनेऊ धारण करने के बाद मनुष्य के मन से सभी प्रकार के बुरे विचार निकल जाते हैं.
  • जनेऊ पहनने के बाद हमारे मन को पवित्रता का अहसास होता हैं.

इन सभी कारणों से जनेऊ पहनी जाती हैं.

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निष्कर्ष

दोस्तों आज हमने आपको इस आर्टिकल के माध्यम से जनेऊ मंत्र / जनेऊ पहनने का मंत्र / ब्राह्मण जनेऊ मंत्र तथा जनेऊ के नियम बताए हैं. इसके अलावा इस टॉपिक से जुडी अन्य और भी जानकारी प्रदान की हैं.

हम उम्मीद करते है की आज का हमारा यह आर्टिकल आपके लिए उपयोगी साबित हुआ होगा. अगर उपयोगी साबित हुआ है. तो आगे जरुर शेयर करे. ताकि अन्य लोगो तक भी यह महत्वपूर्ण जानकारी पहुंच सके.

दोस्तों हम आशा करते है की आपको हमारा यह जनेऊ मंत्र तथा नियम / जनेऊ पहनने का मंत्र / ब्राह्मण जनेऊ मंत्र आर्टिकल अच्छा लगा होगा. धन्यवाद

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