सिद्ध कुंजिका मंत्र 108 बार करने से क्या होता है | सिद्ध कुंजिका स्तोत्र उत्कीलन मंत्र

सिद्ध कुंजिका मंत्र 108 बार करने से क्या होता है | सिद्ध कुंजिका स्तोत्र उत्कीलन मंत्र – आज हम जिस मंत्र के बारे में बात करने वाले है. वह बहुत ही चमत्कारी और सभी समस्या के निवारण में उपयोगी होता हैं. इस मंत्र के बारे में काफी कम लोग ही जानते हैं. यह मंत्र से कोई भी अपने भाग्य को चमकाकर धनवान बन सकते हैं.

दोस्तों आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से सिद्ध कुंजिका मंत्र के बारे में बताने वाले हैं. इस मंत्र को चमत्कारी मंत्र माना जाता हैं. आज हम आपको बताएगे की सिद्ध कुंजिका मंत्र 108 बार करने से क्या होता हैं. तथा यह मंत्र, इसकी विधि और इस मंत्र की स्त्रोत हवन विधि के बारे में आपको जानकारी प्रदान करेगे.

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सिद्ध कुंजिका मंत्र 108 बार करने से क्या होता है

हमारे प्राचीन ग्रंथो में कहा गया है की इस मंत्र को 108 दिन तक रोजाना 108 बार जाप करने से सिद्ध कुंजिका मंत्र सिद्ध हो जाता हैं. तथा इससे इस मंत्र के जाप करने वाले साधक को संपूर्ण सुख सुविधा प्राप्त होती हैं. यह एक ऐसा मंत्र है जिसका जाप प्रत्येक मंत्र के बाद किया जाता हैं.

जैसे की आप धन प्राप्ति के लिए धन प्राप्ति मंत्र का जाप कर रहे हैं. फिर भी मंत्र सिद्ध नहीं हो रहा. और आपको धन की प्राप्ति नही हो रही हैं. तो इस मंत्र का जाप साथ में करने से सफलता मिल जाती हैं. इस मंत्र को श्री सिद्धकुंजिका स्त्रोतम मंत्र कहा जाता हैं.

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अगर आप भाग्य चमकाने वाला मंत्र, धन प्राप्ति मंत्र, मान सम्मान के लिए मंत्र कोई भी मंत्र कर ले लेकिन आपने यह मंत्र का जाप नही किया तो आपको लाभ नही मिलेगा. यह मंत्र स्वयं भगवान शंकर ने अपने मुख से कहा हैं. भगवान महादेव ने माता पार्वती को यह मंत्र सुनाया था. यह मंत्र अत्यंत गोपनीय है. इस मंत्र का जाप किसी को भी बताए बिना करना चाहिए.

अब हम आपको यह मंत्र और यह मंत्र का जाप कैसे करे उसकी विधि बताने वाले हैं.

सिद्ध कुंजिका मंत्र

सिद्ध कुंजिका मंत्र 

“ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे। ऊं ग्लौं हुं क्लीं जूं स: ज्वालय ज्वालय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ज्वल हं सं लं क्षं फट् स्वाहा”

सिद्ध कुंजिका मंत्र साधना विधि

यह मंत्र जाप करने के लिए शांत कमरे में या फिर शांत वातावरण में स्वच्छ जगह पर ढीले जगह वस्त्र पहनकर किसी भी मुद्रा में बैठ जाए. अगर आप जमीन पर बैठ रहे है तो आसन बिछाए. जो लोग जमीन पर नही बैठ सकते हैं. वह लोग सोफा कुर्सी आदि पर बैठ सकते हैं.

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सबसे पहले दस मिनट तक सामान्य प्राणायाम करे. सांस लंबी और गहरी लेकर छोड़े. फिर अपने आज्ञाचक्र यानि की दोनों आँखों के बिच ध्यान केन्द्रित करके ऊपर दिया गया सिद्ध कुंजिका मंत्र का जाप करे. आपको मंत्र का जाप मन में करना हैं. आपकी आवाज दूर तक न जाए इसका ध्यान रखे.

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यह मंत्र का जाप 15 मिनट तक 41 दिन नियमित रूप से करे. इतना करने के बाद इसके चमत्कारिक और प्रभावशाली लाभ आपको देखने मिलेगे. आपके मन की जो भी इच्छा और मनोकामना होगी वह पूर्ण होगी.

सिद्ध कुंजिका स्तोत्र उत्कीलन मंत्र | श्री सिद्धकुंजिका स्त्रोतम

सिद्ध कुंजिका स्तोत्र उत्कीलन मंत्र | श्री सिद्धकुंजिका स्त्रोतम

शृणु देवि प्रवक्ष्यामि कुंजिकास्तोत्रमुत्तमम्।
येन मन्त्रप्रभावेण चण्डीजाप: भवेत्।।1।।
न कवचं नार्गलास्तोत्रं कीलकं न रहस्यकम्।
न सूक्तं नापि ध्यानं च न न्यासो न च वार्चनम्।।2।।
कुंजिकापाठमात्रेण दुर्गापाठफलं लभेत्।
अति गुह्यतरं देवि देवानामपि दुर्लभम्।।3।।

गोपनीयं प्रयत्नेन स्वयोनिरिव पार्वति।
मारणं मोहनं वश्यं स्तम्भनोच्चाटनादिकम्।
पाठमात्रेण संसिद्ध् येत् कुंजिकास्तोत्रमुत्तमम्।।4।।

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।
ॐ ग्लौ हुं क्लीं जूं स:
ज्वालय ज्वालय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल
ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ज्वल हं सं लं क्षं फट् स्वाहा

नमस्ते रुद्ररूपिण्यै नमस्ते मधुमर्दिनि।
नम: कैटभहारिण्यै नमस्ते महिषार्दिन।।1।।

नमस्ते शुम्भहन्त्र्यै च निशुम्भासुरघातिन।।2।।

जाग्रतं हि महादेवि जपं सिद्धं कुरुष्व मे।
ऐंकारी सृष्टिरूपायै ह्रींकारी प्रतिपालिका।।3।।

क्लींकारी कामरूपिण्यै बीजरूपे नमोऽस्तु ते।
चामुण्डा चण्डघाती च यैकारी वरदायिनी।।4।।

विच्चे चाभयदा नित्यं नमस्ते मंत्ररूपिण।।5।।

धां धीं धू धूर्जटे: पत्नी वां वीं वूं वागधीश्वरी।
क्रां क्रीं क्रूं कालिका देवि शां शीं शूं मे शुभं कुरु।।6।।

हुं हुं हुंकाररूपिण्यै जं जं जं जम्भनादिनी।
भ्रां भ्रीं भ्रूं भैरवी भद्रे भवान्यै ते नमो नमः।।7।।

अं कं चं टं तं पं यं शं वीं दुं ऐं वीं हं क्षं धिजाग्रं धिजाग्रं त्रोटय त्रोटय दीप्तं कुरु कुरु स्वाहा।।8।।

पां पीं पूं पार्वती पूर्णा खां खीं खूं खेचरी ।।9।।

सां सीं सूं सप्तशती देव्या मंत्रसिद्धिंकुरुष्व मे।।
इदंतु कुंजिकास्तोत्रं मंत्रजागर्तिहेतवे।।।10।।

अभक्ते नैव दातव्यं गोपितं रक्ष पार्वति।।
यस्तु कुंजिकया देविहीनां सप्तशतीं पठेत्।
न तस्य जायते सिद्धिररण्ये रोदनं यथा।।
इतिश्रीरुद्रयामले गौरीतंत्रे शिवपार्वती संवादे कुंजिकास्तोत्रं संपूर्णम्।

सिद्ध कुंजिका स्तोत्र हवन विधि

यह मंत्र के जाप की शुरुआत नवरात्री से या किसी भी माह की अष्टमी या शुक्ल पक्ष के मंगलवार या शुक्रवार से करनी चाहिए. इस मंत्र का जाप रात को 10 बजे बाद कर सकते हैं. सबसे पहले जातक को सुबह में उठकर स्नान आदि करने के बाद शुद्ध लाल कलर के वस्त्र धारण करने चाहिए. फिर लाल रंग का आसन बिछाकर पूर्व या उत्तर की तरफ मुहं रखकर बैठ जाए.

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अब आपके सामने चौकी रखकर लाल कपड़ा बिछाकर माँ दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करे. अब पुष्प, कंकू आदि चढ़ाकर घी का दीपक और धुप बत्ती जलाए. फिर माँ दुर्गा को मिठाई का भोग लगाए. अब हाथ में पानी लेकर 9 दिन, 21 दिन, 51 दिन या 108 दिन यह पाठ करने का संकल्प ले. संकल्प लेने के बाद भूमि छोड़ सकते हैं.

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अब यह पाठ की शुरुआत आप कर सकते हैं. जब आपके संकल्प के दिन पूर्ण हो जाए दान आदि करे और कन्याओं को भोजन कराए. ऐसा करने से आपकी मनोकामना पूर्ण होती हैं.

निष्कर्ष

दोस्तों आज हमने आपको इस आर्टिकल के माध्यम से सिद्ध कुंजिका मंत्र 108 बार करने से क्या होता है तथा यह मंत्र और जाप करने की विधि बताई हैं. और सिद्धकुंजिका स्त्रोतम और प्रयोग विधि भी आपको बताई हैं. यह मंत्र बहुत ही प्रभावशाली हैं. इस मंत्र जाप से सभी समस्या का निवारण होता हैं. अगर आपको भी कोई समस्या है तो यह मंत्र जाप करे आपको जरुर लाभ होगा.

दोस्तों हम आशा करते है की आपको हमारा यह आर्टिकल सिद्ध कुंजिका मंत्र 108 बार करने से क्या होता अच्छा लगा होगा. धन्यवाद

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